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Market Insight: वीकली एक्सपायरी पर दबाव में निफ्टी, बैंक शेयरों में बिकवाली; IT सेक्टर पर अनुज सिंघल की नजर

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Alam Ki Khabar | Business News | Market News | Share Market | वीकली एक्सपायरी के दिन निफ्टी और बैंक निफ्टी पर दबाव है। अनुज सिंघल ने इंडेक्स के बजाय चुनिंदा शेयरों पर फोकस की बात कही और IT सेक्टर को मजबूत नजरिए वाला बताया।

नई दिल्ली, 11 अगस्त। आलम की खबर: वीकली एक्सपायरी के दिन घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच बैंकिंग शेयरों पर खास दबाव दिखाई दे रहा है। निफ्टी 24,500 के स्तर के नीचे फिसला है, जबकि बैंक निफ्टी में भी कमजोरी बनी हुई है। बाजार की मौजूदा चाल को देखते हुए विशेषज्ञों का जोर फिलहाल पूरे इंडेक्स की बजाय चुनिंदा शेयरों और सेक्टर पर नजर रखने पर है।

सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल के मुताबिक मौजूदा बाजार में इंडेक्स ट्रेडिंग से ज्यादा अवसर व्यक्तिगत शेयरों में दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि निफ्टी फिलहाल सीमित दायरे में घूम रहा है और बड़े ब्रेकआउट के लिए अभी कोई मजबूत ट्रिगर नजर नहीं आ रहा।

निफ्टी में सीमित दायरा, शेयरों पर ज्यादा फोकस

अनुज सिंघल के मुताबिक पिछले सत्र में भी इंडेक्स की चाल सीमित रही, जबकि कई मिडकैप शेयरों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला। ऐसे माहौल में उनका मानना है कि केवल इंडेक्स की दिशा पकड़ने के बजाय कंपनियों के नतीजों, उनकी स्थिति और बाजार में उनकी पोजिशनिंग को देखकर ट्रेडिंग रणनीति बनाना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

उनके मुताबिक हाल के सत्र में कुछ चुनिंदा शेयरों ने इंडेक्स की तुलना में बेहतर ट्रेडिंग अवसर दिए। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में पैसा पूरी तरह से बाहर नहीं जा रहा है, बल्कि अलग-अलग शेयरों और सेक्टरों के बीच घूम रहा है।

IT सेक्टर पर क्यों बनी नजर?

वीकली एक्सपायरी के बीच IT सेक्टर को लेकर अनुज सिंघल का नजरिया अपेक्षाकृत सकारात्मक है। उनका कहना है कि निफ्टी IT अपने 200-डे मूविंग एवरेज के काफी करीब पहुंच चुका है और मौजूदा रैली इस इंडेक्स की हालिया मजबूत चाल में शामिल है।

यही वजह है कि बाजार में कमजोरी के बावजूद IT शेयरों पर नजर रखने की बात कही जा रही है। हालांकि किसी भी सेक्टर में तेजी की संभावना को निवेश की गारंटी नहीं माना जा सकता और वास्तविक ट्रेडिंग निर्णय में जोखिम का आकलन जरूरी है।

बैंकिंग शेयरों पर दबाव

बाजार की मौजूदा तस्वीर में बैंकिंग शेयर कमजोर नजर आ रहे हैं। बैंक निफ्टी में 500 अंकों से अधिक की गिरावट का उल्लेख करते हुए अनुज सिंघल ने PSU बैंकों पर विशेष सावधानी बरतने की बात कही है।

उनके मुताबिक बैंक निफ्टी के लिए 57,400 से 57,500 का क्षेत्र महत्वपूर्ण जोन हो सकता है। ऊपर की तरफ 58,000 से 58,200 के बीच का क्षेत्र चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

HDFC Bank पर भी नजर रखने की बात कही गई है, क्योंकि शेयर हाल के सत्रों में 52-हफ्ते के निचले स्तर के आसपास बना हुआ है।

निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस

निफ्टी के लिए 24,500 से 24,550 का स्तर शुरुआती सपोर्ट क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है। इससे नीचे 24,350 से 24,400 का क्षेत्र बड़ा सपोर्ट माना गया है।

वहीं ऊपर की तरफ 24,625 से 24,675 पहला रेजिस्टेंस जोन है। इसके बाद 24,750 से 24,800 का क्षेत्र महत्वपूर्ण माना गया है।

विशेषज्ञ की राय में जब तक निफ्टी इस सीमित दायरे से बाहर निकलकर कोई स्पष्ट दिशा नहीं दिखाता, तब तक इंडेक्स में आक्रामक ट्रेडिंग से बचना बेहतर हो सकता है।

कच्चे तेल की कीमत बाजार के लिए चिंता

घरेलू बाजार के लिए अंतरराष्ट्रीय संकेत पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। कच्चे तेल की कीमत में तेजी भारतीय बाजार के लिए चिंता बढ़ा सकती है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है।

इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी उभरते बाजारों के लिए दबाव का कारण बन सकती है। ऐसे वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू बाजार में विदेशी निवेशकों की खरीदारी एक सकारात्मक पहलू के रूप में देखी जा रही है।

FII खरीदारी से मिल रहा सहारा

बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की कैश खरीदारी को फिलहाल एक महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। निचले स्तरों पर विदेशी खरीदारी बाजार को सपोर्ट दे सकती है।

हालांकि केवल FII खरीदारी के आधार पर बाजार की दिशा तय करना उचित नहीं होगा। वैश्विक बाजार, तेल की कीमत, बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के प्रदर्शन समेत कई कारक बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।

RIL और अदाणी शेयरों पर भी नजर

निफ्टी को मजबूती देने में रिलायंस इंडस्ट्रीज की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में बाजार की दिशा के लिए RIL की चाल पर भी नजर रहेगी।

अदाणी समूह के शेयर भी चर्चा के केंद्र में हैं। विशेषज्ञ की ओर से हाल के समय में इन शेयरों पर सकारात्मक नजरिया जताया गया है, हालांकि तेजी के दौरान मुनाफावसूली की रणनीति अपनाने और गिरावट में अवसर तलाशने की बात कही गई है।

इसके अलावा BSE और Wipro जैसे शेयरों में भी ट्रेडिंग के अवसर तलाशने की बात कही गई है। हालांकि ये व्यक्तिगत ट्रेडिंग राय हैं और इन्हें निवेश की निश्चित सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

क्या निफ्टी अपनी रेंज तोड़ेगा?

बाजार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि निफ्टी मौजूदा सीमित दायरे से कब बाहर निकलेगा। फिलहाल इसके लिए कोई बड़ा घरेलू ट्रिगर स्पष्ट नहीं दिख रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बाजार के लिए जोखिम बनी हुई है, जबकि FII खरीदारी निचले स्तर पर कुछ सहारा दे रही है। ऐसे में बाजार में अचानक तेज चाल आने की स्थिति में रणनीति बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

वीकली एक्सपायरी पर ऑप्शन ट्रेडर्स के लिए सावधानी

आज वीकली एक्सपायरी होने के कारण ऑप्शन प्रीमियम में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे माहौल में छोटी सी दिशा बदलने पर भी ऑप्शन की कीमतों में बड़ा अंतर आ सकता है।

अनुज सिंघल ने ऑप्शन पोजिशन को लेकर सावधानी बरतने और एक्सपायरी के दिन जोखिम को नियंत्रित रखने पर जोर दिया है। उनका सुझाव है कि ट्रेडर्स को अपनी क्षमता और जोखिम के अनुसार ही पोजिशन रखनी चाहिए।

बाजार में इस समय सबसे जरूरी बात यह है कि केवल इंडेक्स की छोटी चाल के पीछे भागने के बजाय स्पष्ट सेटअप वाले शेयरों पर नजर रखी जाए। निफ्टी और बैंक निफ्टी में किसी बड़े ब्रेकआउट के संकेत मिलने पर ही रणनीति में बड़ा बदलाव करना बेहतर हो सकता है।

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बाजार की छोटी रेंज में बड़ा जोखिम

शेयर बाजार में जब इंडेक्स लंबे समय तक एक सीमित दायरे में चलता है तो ट्रेडर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती सही दिशा का चुनाव होती है। छोटी तेजी के बाद गिरावट और फिर अचानक रिकवरी से गलत पोजिशन में फंसने का जोखिम बढ़ जाता है।

मौजूदा स्थिति में यही वजह है कि चुनिंदा शेयरों पर ध्यान देने की रणनीति ज्यादा व्यावहारिक दिखाई देती है। लेकिन किसी भी शेयर या सेक्टर को पूरी तरह सुरक्षित मानना सही नहीं होगा।

IT सेक्टर में मजबूती के संकेत हों या बैंकिंग शेयरों में दबाव, बाजार की तस्वीर तेजी से बदल सकती है। कच्चे तेल, विदेशी निवेश, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम जैसे कारक घरेलू बाजार की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं।

इसलिए एक्सपायरी के दिन ट्रेडर्स के लिए सबसे अहम चीज केवल मुनाफा नहीं, बल्कि जोखिम को सीमित रखना है। सपोर्ट और रेजिस्टेंस के स्तर टूटने या कायम रहने के आधार पर रणनीति में बदलाव करना ज्यादा संतुलित तरीका हो सकता है।

डिस्क्लेमर: इस खबर में बाजार से संबंधित स्तर और रणनीतियां विशेषज्ञ के बताए नजरिए पर आधारित हैं। यह किसी भी प्रकार की निवेश सलाह नहीं है। निवेश या ट्रेडिंग का निर्णय लेने से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की सलाह लें। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है।

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